छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कॉलेज में दाखिला दिलाने के नाम पर 30 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में हस्तक्षेप करने और एफआईआर (FIR) रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि भले ही आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच आर्थिक समझौता हो गया हो, लेकिन मामले की प्रकृति सामाजिक प्रभाव डालने वाली है, इसलिए इसकी पूरी जांच आवश्यक है।
सिविल लाइन थाना बिलासपुर में हेमंत मोदी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि शिवम शर्मा और विनीत सिंह सहित पांच लोगों ने उनके बेटे के एडमिशन का झांसा देकर जून से अगस्त 2025 के बीच किस्तों में 30 लाख रुपये की ठगी की। हालांकि, सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकील ने तर्क दिया कि दोनों पक्षों के बीच 16 अप्रैल 2026 को समझौता हो चुका है और 24 लाख रुपये की राशि वापस लौटा दी गई है, जिसके आधार पर याचिकाकर्ताओं ने कानूनी कार्यवाही को समाप्त करने की मांग की थी।
पुलिस को क्लोजर रिपोर्ट पेश करने के आदेश
लेकिन राज्य शासन ने इसका विरोध करते हुए दलील दी कि गलत तरीके से कॉलेज प्रवेश दिलाने की कोशिश केवल एक निजी विवाद नहीं बल्कि समाज से जुड़ा अपराध हैं। हाईकोर्ट ने इन दलीलों से सहमत होते हुए निर्देश दिया कि दोनों पक्ष जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर समझौता पत्र प्रस्तुत करें। साथ ही कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि वे इस समझौते को संज्ञान में लेते हुए जांच को पूर्ण करें और कानून के प्रावधानों के अनुरूप ही ट्रायल कोर्ट में अंतिम या क्लोजर रिपोर्ट पेश करें।
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